मौत का ‘सिंक्रोनाइज्ड’ कॉल, 350 KM की दूरी, एक ही वक्त और दो जान… मोहब्बत के खौफनाक अंत की रोंगटे खड़े कर देने वाली दास्तान!

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मध्य प्रदेश के दो अलग-अलग छोरों पर शनिवार की सुबह जब सूरज की पहली किरण पड़ी, तो किसी को इस बात का इल्म नहीं था कि दो शहरों के बीच मौत का एक ऐसा खौफनाक कनेक्शन जुड़ा है जो रूह कंपा देगा। रायसेन के उदयपुरा की शांत वादियों और उज्जैन के पवासा की व्यस्त गलियों के बीच की 350 किलोमीटर की दूरी उस वक्त सिमट कर शून्य हो गई जब एक प्रेमी जोड़े ने मौत को गले लगाने के लिए एक ही वक्त और एक ही रास्ता चुना। यह महज दो खुदकुशी के मामले नहीं थे, बल्कि एक ऐसी खौफनाक ‘डेथ डील’ थी जिसे मोबाइल की कॉल डिटेल्स और आखिरी बातचीत ने बेनकाब कर दिया। उदयपुरा के चिल्ली गांव में अपने नाना के घर रह रही 23 वर्षीय साक्षी धाकड़ ने जब सुबह 6 बजे फंदे को गले लगाया, ठीक उसी पल उज्जैन की केसरबाग कॉलोनी में रहने वाले इंजीनियर ऋषभ मीणा ने भी अपनी सांसों की डोर काट दी।

इस कहानी का सबसे विचलित करने वाला पहलू वह पागलपन था जो ऋषभ के सिर पर सवार था, क्योंकि उसने जान देने के लिए सिर्फ फंदा नहीं चुना बल्कि मौत से कई बार जद्दोजहद की। पुलिस की तफ्तीश में सामने आया कि पेशे से इंजीनियर इस युवक ने पहले अपने हाथ और गले की नसें काटीं और जब उससे भी जी नहीं भरा तो खुद को करंट तक लगाया, लेकिन जब मौत ने रास्ता नहीं दिया तो उसने बालकनी की रेलिंग को अपना आखिरी ठिकाना बना लिया। उधर रायसेन में साक्षी की खामोश मौत ने गांव को सन्न कर दिया था और शुरुआती घंटों तक किसी को भनक नहीं थी कि इन दो मौतों का तार एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। रविवार को जब पुलिस ने मोबाइल की कॉल डिटेल्स और चैट की परतों को उधेड़ना शुरू किया, तब जाकर उस रात का सच सामने आया जिसे दोनों अपने साथ ले जाना चाहते थे।

शुक्रवार की पूरी रात इन दोनों प्रेमियों के बीच फोन पर लंबी गुफ्तगू चलती रही और जैसे-जैसे रात गहराती गई, वैसे-वैसे मौत का फैसला भी पुख्ता होता गया। सुबह 6 बजे ऋषभ ने साक्षी को आखिरी कॉल किया और जैसे ही दोनों ने एक-दूसरे की आवाज को अंतिम बार सुना, ऋषभ ने अपना फोन फ्लाइट मोड पर डाल दिया ताकि दुनिया का कोई भी शोर उनके इस आखिरी सफर में खलल न डाल सके। रायसेन का रहने वाला ऋषभ उज्जैन में करियर बनाने आया था लेकिन इश्क की नाकामियों या किसी अनकहे दबाव ने उसे इस कदर तोड़ा कि उसने अपनी इंजीनियरिंग की सूझबूझ का इस्तेमाल सिर्फ अपनी जान लेने के तरीकों को खोजने में किया। पवासा और उदयपुरा पुलिस अब उस मोबाइल चैट के हर अक्षर को डिकोड कर रही है जो इस दोहरी मौत के पीछे के असली ‘विलेन’ को सामने ला सके, क्योंकि 350 किलोमीटर दूर बैठकर एक ही समय पर जान देने का यह खौफनाक तालमेल किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से भी ज्यादा डरावना और दुखद है।