कलेजे के टुकड़े को मौत के हवाले कर गई निष्ठुर ममता

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उत्कल एक्सप्रेस के टॉयलेट में तड़पता मिला मासूम, चीखों से दहल गया कटनी स्टेशन

कटनी। मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने ममता के आंचल पर बदरंग दाग लगा दिया है। हरिद्वार से चलकर पुरी की ओर जाने वाली उत्कल एक्सप्रेस जब अपनी रफ्तार से पटरियों पर दौड़ रही थी, तब उसके भीतर एक मासूम की जिंदगी और मौत के बीच जंग चल रही थी। ट्रेन के कोच नंबर एस-4 के बदबूदार और संकीर्ण टॉयलेट में एक नवजात शिशु लावारिस हालत में पड़ा मिला। जिस उम्र में बच्चे को मां की गोद की गर्माहट और सीने की धड़कन मिलनी चाहिए थी, उस उम्र में उसे लोहे की ठंडी फर्श और गंदगी के बीच मरने के लिए छोड़ दिया गया।

जैसे ही ट्रेन कटनी मुड़वारा स्टेशन पर रुकी, टॉयलेट से आती मासूम की सिसकियों ने यात्रियों के दिल दहला दिए। सूचना मिलते ही आरपीएफ और जीआरपीएफ की टीम मौके पर पहुंची और आनन-फानन में उस नन्ही सी जान को मौत के मुंह से बाहर निकाला गया। पुलिसकर्मियों ने जब उस कांपते हुए शरीर को अपने हाथों में लिया, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं और हर जुबान से उस अभागी मां के लिए धिक्कार निकलने लगा जो अपने ही अंश को इस बेरहमी से त्याग गई।

पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए नवजात को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उसे एसएनसीयू (SNCU) वार्ड में भर्ती किया गया है। डॉक्टरों की टीम लगातार बच्चे की निगरानी कर रही है और गनीमत रही कि समय रहते उपचार मिलने से उसकी हालत अब स्थिर बताई जा रही है। अस्पताल के सफेद बेड पर लेटा वह मासूम इस बात से बेखबर है कि जिस दुनिया में उसने अभी कदम ही रखा था, उसने उसे इतना कड़वा अनुभव दिया है।

फिलहाल, आरपीएफ और जीआरपीएफ पुलिस इस पूरे मामले की गुत्थी सुलझाने में जुट गई है। ट्रेन के उस कोच में सफर कर रहे यात्रियों की सूची खंगाली जा रही है और सीसीटीवी फुटेज के जरिए उस पाषाण हृदय मां की तलाश की जा रही है जिसने लोकलाज या किसी मजबूरी के नाम पर ममता का गला घोंट दिया। सवाल यह उठता है कि आखिर कोई मां इतनी निष्ठुर कैसे हो सकती है कि अपने जिगर के टुकड़े को इस तरह लावारिस छोड़ दे? यह घटना समाज के गिरते नैतिक मूल्यों पर एक तीखा प्रहार है, जो चीख-चीख कर पूछ रही है कि उस मासूम का कसूर क्या था?